Wednesday, December 05, 2012

मन की पीड़ा



मन की पीड़ा - डॉ0 महाबीर सिंह,

प्रतिबिम्ब प्रकाशन, एम-23, इन्दिरा नगर, रायबरेली (उ.प्र.)
संस्करण प्रथम- 2001, पेपर बैक, पृष्ठ-42 , मूल्य- 90 रुपए।



समीक्ष्य पुस्तक में 218 हाइकु हैं। ये हाइकु विविध विषयों पर लिखे गए हैं। जीवन के प्रति कवि का दृष्टिकोण अधिक चिन्तनशील दिखाई देता है- जिन्दगी बोझ/ हर कदम पर/ जिन्दगी शोध। पैबन्द लगे/ जीवन चादर में/सुख-दुःख के। बच्चों का बचपन बस्ते के बोझ से दबा देखकर कवि कहता है- बस्तों का बोझ/ ढो रहा बचपन/ थका हारा सा। प्रकृति का कलात्मक चित्रण भी कवि ने किया है- चाँद घुलता/ किसके विरह में / रोज व रोज।
इस संग्रह में हाइकु कविताओं के साथ-साथ 01 हाइकु गीत, 11 सेदोका, 14 ताँका, और 02 चौका कविताएँ हैं। सेदोका, ताँका और चौका जापानी कविताओं के विभिन्न रूप हैं। ताँका 5-7-5-7-7 के वर्णक्रम में पाँच पंक्तियों की कविता है। इसी से हाइकु कविता का विकास हुआ है। सेदोका 5-7-7-5-7-7 के क्रम में छः पंक्तियों की कविता है और चौका लम्बी कविता है। प्रस्तुत हैं इन कविताओं के कुछ अंश-

  ढाई आखर/मंत्र परम लघु/कहे कबीरा/
  विष प्याला पी गई/प्रेम दीवानी मीरा।       (ताँका)

  कोयल कूकी/तन मन बहका/ उपवन दहका/
  कलियाँ फूलीं/ अलि संदेश लाया। सखि, फागुन आया।    (सेदोका)

इस संग्रह में कई रचनाएँ कमजोर हैं जिन्हें हाइकु न कहकर मात्र स्टेटमेंट कहा जा सकता है। जैसे-  
कराह रहा /बीमार लोकतंत्र/ हिन्दुस्तान का।
नाजुक रिश्ते/ आपसी तनाव से/ टूटते गए।

ऐसी रचनाओं से कवि को बचना चाहिए था। संग्रह का मूल्य अपेक्षा से बहुत अधिक है। पेपर बैक 42 पृष्ठ की पुस्तक का मूल्य 90 रुपए है, आवरण और अच्छा बनाया जा सकता था।

-(हाइकु दर्पण, अंक - 03 से साभार)

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